Hasaya kavita

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माता पिता के अंद पंद रुल अंद पन्द खेल कुद बंद यह कैसा रुल बनाया है , माता पिता ने विद्या के नाम पर हमे फूल बनाया है I I एक नही दो नही पाँच घंटे पढवाते है , अवल आने पर मँह मिठा भी नही करवाते है I I दिमाग बढवाने के लिए रोज़ अंडा खिलवाते है , परिक्षा में अंडा लाने पर डंडो से नृत्य करवाते है I I जो हमे समझ में नही आता , वो भी ठुस कर याद करवाते है I I मुझे लगता है मुझ पर फिल्म बनेगी , हलाल बकरा उसका सर्वोत्त्म ताइत्ल होगी I I अच्छा करने पर और अच्छा करवाना चाहते है , खाने कि दिमांड सुने पर चप्पल ले आते है I I पढने को तो ऐसा हथियार बना रखा है कि अगर पढते समय उबासी भी आए तो मँह पर रखना ही अच्छा है I I हर बच्चे के माता पिता होते तो सहायक है , पर उनसे अच्छे तो महाभारत और रामायण के कसं और रावण है I I अच्छा स्वाद खाने के बताने पर चतू जबान बुलाते है , सही उत्तर सभी प्रशनो के बताने पर तुका तुका चिलाते है I I बच्चो यह कविता तो आप का मन बहलाने के लिए है , असलियत में आपके माता पिता ही सर्वोत्त्म नायक है I I